सरस्वती पूजा 

रोज़ की तरह आज सुबह जब माँ को फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि आज सरस्वती पूजा है और हम स्नान कर पूजा करने के पश्चात ही कुछ खायें। ऐसा नहीं था कि विगत कुछ वर्षों में पहली बार मैं सरस्वती पूजा का दिन भूल रहा था लेकिन फिर भी माँ का सरस्वती पूजा याद दिलाना …

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बचपन के जादूई खेल

चौठ चंद्रमा की पूजा थी और बड़े भैया घर आने वाले थे। हम दोनो भाई काफ़ी ख़ुश थे क्योंकि बड़े भैया जब भी गाँव आते थे तो अपने साथ ढेर सारी ऐसी चीज़ें लेकर आते थे जिसे देखकर हम बहुत खुश और आश्चर्यचकित होते थे। उनके आने से एक तरफ़ ये ख़ुशी होती थी कि …

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भैया की साइकिल

गाँव में पड़ी सालों पुरानी साइकिल को देखकर पिताजी ने कहा ये साइकिल यहाँ से हटा देनी चाहिए, बस यूँ ही जगह ले रहा है और इसे अब कोई चलाने वाला नहीं है, इसलिए बेहतर है किसी को दे देते हैं। हम दोनों भाई थोड़ी देर के लिए एक दूसरे को देखते रहे और सोचने …

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मेरा स्कूल बस्ता !!!

शहर के भाग दौड़ में बच्चों की पीठ पर खुद से ज्यादा वजन का बस्ता और रिक्शा में लदे हुए बच्चों को देखकर अक्सर ये लगता है कि शायद मेरा बचपन बहुत ही सरल था। हमारी पीठ पर भारी बस्ते का बोझ नहीं होता था और हम ऑटो या रिक्शा में साँस फुला देने वाले …

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मैं कौन हूँ ??

मैं कौन हूँ  ?? यह सवाल हर व्यक्ति के मन में आएगा जो मेरे ब्लॉग पर आएंगे। यह लाजिमी है, क्योकि ना तो मैं अभिनेता हुँ और ना ही नेता वाला अभिनेता हुँ, जिसका हर आये दिन मीडिया जगत में लोग नाम लेते हैं। फिर मैं कौन हूँ, यह बताना बेकार है, फिर भी कोशिश …

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